A look at suburban Mumbai life, it's preocupations, it's anxieties. Some comments, some contemplation. Sometimes funny, sometimes sad. The way life is.
Sunday, March 27, 2011
ओ रे माझी, ओ रे पाजी..
एकलन के एक:
बकलन के दो:
तिकलन के तीन:
(चित्र को बड़ाकार देखने के लिए उसपे चटका लगाकर नई खिड़की में खोलें)
यह ख्वाबों की वो नगरिया तो नही है जिसकी गलियाँ हर रात सजती हैं और हर सुबह वीरान होती हैं...इस लापतागंज की कोई खोजखबर तो दीजिये.कोई पिनकोड, आइएसडी, येल्लोपेज, यूआरएल..कुछ... खैर अलग-अलग इनको फ़िगर-आउट करने की कोशिश कर रहा हूँ..और कोशिश ही करता रहूँगा..:-( मगर शुक्रिया कि दीवार मे यह खिड़की तो मिली..
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यह ख्वाबों की वो नगरिया तो नही है जिसकी गलियाँ हर रात सजती हैं और हर सुबह वीरान होती हैं...इस लापतागंज की कोई खोजखबर तो दीजिये.कोई पिनकोड, आइएसडी, येल्लोपेज, यूआरएल..कुछ...
खैर अलग-अलग इनको फ़िगर-आउट करने की कोशिश कर रहा हूँ..और कोशिश ही करता रहूँगा..:-(
मगर शुक्रिया कि दीवार मे यह खिड़की तो मिली..
इन तस्वीरों में हम साउदी अरब , ईरान , दुबई और अपने देश की सैर कर आए... अनोखा स्वप्नलोक...
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